गलत या सही?
धूप को करके किनारा चांद का लेकर सहारा
छोड़ के घर घर बनाने मै चला था
धूप में दीपक जलाने मै चला था
दिया बिन तेल के रोशन कराने मैं चला था
खुद ही में खो गया हूं सोचता हूं खुद से खुद को ढूढ़ लाऊ
उजाला दे किसी को अंधेरी रात में मै यूं चला था
तुम्हारे साथ में मै यूं चला था
समझना था ज़रूरी क्यों चला था
बढ़ाता था कदम मै यूं निरंतर चाह में पाने की तुझको
सुमित एक साथ में मेरे परस्पर तब चला था
महीनों का सफर कुछ साल इस कदर चला था
टूटे ख्वाब से मैं ऐसे बिखर चला था
मंजिलों का कौन जाने कर्म करता रह अमन
मिलेगा क्या मुझे मै सोच कर क्या चला था
इरादे पक्के कर इस रह में तू क्या चला था?
चला चल सोच न सही से राह में तू क्या चला था
—Aman Dwivedi