हमे तुम न काटो हम तुम्हारे लिए हैं।
ज़मीं पर खड़े है सहारे लिए हैं,
हमे तुम न काटो हम तुम्हारे लिए हैं।
कहीं तो रुकोगे किसी झोपड़ी में,
ये धरती ये अम्बर तुम्हारे लिए है।
हमने किया है हवाओं को कोमल,
गगन में दरस चांद तारे दिए हैं।
मेज-कुर्सी की बैठक और बिस्तर की नींद,
इस सुकूं के लिए तन हमारे दिए हैं।
ऐशो अरामो में घर में पड़े हो,
तुम्हे क्या पता क्या खसारे दिए हैं।
कितने कटे हैं और कितने कटेंगे,
क्या तुमने कभी भी सहारे दिए हैं।
चलो मान लूं मेरी किस्मत है कटना,
पर जब भी कटे है तुम्हारे लिए है।
तुम पौधा लगाते हो उसको बढ़ाते हो,
तो फल फूल छाया हमारे लिए है।
अगर बाग में तुमने अपने लगाया,
तो तुमने कुसुम के नज़ारे लिए हैं।
ज़मीं पर खड़े है सहारे लिए हैं,
हमे तुम न काटो हम तुम्हारे लिए हैं
— Aman Dwivedi