मैंने जो रंग चुना वो काला है
सभी रंग के लोग यहां जो मैंने चुना वो काला है,
श्वेत वर्ण पर रंग चढ़ेंगे पर काले में बस काला है।
किसी रंग में रंग मिला दो नया रंग बन जाएगा,
काले में आकर सब सिमटे एक रंग बस काला है।
देख रहे तुम श्वेत केशरी लाल नारंगी जीवन में
पता नहीं क्यों मेरी नज़रों के आगे बस काला है।
क्या जानूं किसके बारे में कौन कहा से कैसा है
उसके आगे दिख जाएगा किस किस का मन काला है।
क्या जानूं की तुम लोगो की रातें कितनी कली थी
रातों का बतलाऊ क्या दिन तक मेरा काला है
काले चेहरे ओढ़ के चादर दिल अज़ीज़ वन जाते है
जिस दिन चादर उद जाएगा दिख जाएगा काला है
—Aman Dwivedi