मुझे रातों मे जगना पसंद है

मुझे रातों मे जगना पसंद है

मुझे रातों मे जगना पसंद है

हाँ मुझे सबसे छुप कर ख़ुद को पढ़ना पसंद है

मुझे रातों मे जगना पसंद है

दौड़ते भागते दिनभर इस जीवन की लड़ाई मे...

साँसों की शांति मे मुझे ख़ुद को समेटना पसंद है...

हाँ मुझे रातों मे जगना पसंद है...

जरूरतों के आगे तो गुम सा ही हो जाता हूँ...

सोने से पहले एक बार अपनी ख्वाहिशों मे जीना पसंद है...

हाँ मुझे रातों मे जगना पसंद है....

बिखर जाते है कई बार दिन के तूफ़ान से लड़ते लड़ते...

तब अंधेरे की उन ठंडी फ़िज़ाओं मे ख़ुद को पिरोना पसंद है...

हाँ मुझे रातों मे जगना पसंद है...

नासमझ बन,फर्जी सी मुस्कान के साथ चलते रहे उस शोर मे....

पर उस सुनसान पेहर मे ख़ुद की आवाज़ समझना पसंद है....

हाँ मुझे रातों मे जगना पसंद है....

सोते होंगे सब अपने हसीन ख्वाबों के लिऐ...

पर मुझे खुली आंखों से अपने सपने सजाना पसंद है...

हाँ मुझे रातों मे जगना पसंद है...

सफल होने के इस शौक मे शामिल हो गए हम अपनो के लिऐ....

पर जब कोई ना आ सके आस पास ...

मुझे ख़ुद के साथ वक्त बिताना पसंद है...

हाँ हाँ मुझे सबसे छुप कर ख़ुद को पढ़ना पसंद है

मुझे रातों मे जगना पसंद है

—Yashashwi Shrivastava