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आशा और निराशा
बैठ गया क्या पथिक हार कर । हार गया यह खुद ही मान कर।। रोड़े तुझे गिराएंगे, गति में अवरोध लगायेगे , तू जब जब उठना चाहेगा, तब तब तुझे गिराएंगे
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बैठ गया क्या पथिक हार कर । हार गया यह खुद ही मान कर।। रोड़े तुझे गिराएंगे, गति में अवरोध लगायेगे , तू जब जब उठना चाहेगा, तब तब तुझे गिराएंगे
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नारी शक्ति को समर्पित तू वक्त की रफ्तार है ! तू तलवार की धार है ! तू शिव की शक्ति है! तू कृष्ण की भक्ति है ! तू नित नई शुरुआत है! तू मानवता का
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उन तारों में एक सितारा मेरा भी कुछ ग़ज़लों में ज़िक्र तुम्हारा मेरा भी लाख समुंदर सैलाबों से वार करे उस दरिया का एक किनारा मेरा भी छो
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धूप को करके किनारा चांद का लेकर सहारा छोड़ के घर घर बनाने मै चला था धूप में दीपक जलाने मै चला था दिया बिन तेल के रोशन कराने मैं चला था खुद
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सभी रंग के लोग यहां जो मैंने चुना वो काला है, श्वेत वर्ण पर रंग चढ़ेंगे पर काले में बस काला है। किसी रंग में रंग मिला दो नया रंग बन जाएगा