तुम्हारा और मेरा
उन तारों में एक सितारा मेरा भी
कुछ ग़ज़लों में ज़िक्र तुम्हारा मेरा भी
लाख समुंदर सैलाबों से वार करे
उस दरिया का एक किनारा मेरा भी
छोड़ गए तूफानों में तन्हा हमको,
होना चहिए था एक सहारा मेरा भी
आग लगे तो जल जाते हैं महल कई
झुलस गया है घर तुम्हरा मेरा भी
तूफानों में होते रहते अक्सर नुक्सां
अब कि बारी एक खसारा मेरा भी
—Aman Dwivedi