विचारों के पहलु।

विचारों के पहलु।

एक गुल अब्बासी गुल ।
किसी रंगसाज की कृति?
एक पद-चिन्ह के भीतर ।
किसी पदकमल की छाप?
भू में सिमटी एक रचना।
किसी गुलदान की नक़्क़ाशी?
एक निराश्रित प्रतिरूप।
किसी कमण्डल का उत्कर्ष?
एक कृतज्ञ किसी गुलगीर का ।
किसी नृत्यांगनी का अलंकार?

इस दृश्य को देखकर !
उदासीनता से विचलित ,रंजित ह्रदय का ये अनुभव।
सोच के संघर्ष में , कहीं अस्त् न हो जाये ?
इस भय के सहारे , संघर्ष का उत्साह |
चेतना के समक्ष , एक पहलु और भी|

नियति के नियम की वजह को खोजना ,
नियति के नियम के समक्ष उत्तेजना,
उस नियति के नियम की आलोचना,
किसी अग्यानता से पूर्ण,
एक अंधकार के राही के अनुसार।
जिसके परिणामस्वरूप भय,क्रोध व्यर्थ है।

ये नियति ही है जो जीवन देह है ।
ये नियति ही तो है! हर काल की रचयता |
इस नियति के सामने फिर भय कैसा ?
इस नियति के समक्ष फिर रंज कैसा?
इस नियति के समीप तो निर्विरोह नतमस्तक ,
जिसके प्रवाह से ही है ,
एक प्रचण्ड वर्तमान , एक संपन्न भविष्यकाल।