याद
जाने कितने दर्द दिलो के दिल में राखे बैठा हूं
शब सुबह और रातों में बस तुझको ताके बैठा हूं
पता नहीं तू कब आएगी मुझसे कब बतलाएगी
तेरे कहे सभी लफ़्ज़ों को दिल में लाके बैठा हूं
तुझे पता मै कितना तेरा और तू कितनी मेरी है
तेरी मेरी बातें सारी तुझे बता के बैठा हूं
तब तक तुझको याद करूंगा जब तक तू आजाए न
नहीं गिले शिकवे है तुझसे इन्हे जलाके बैठा हूं
याद तेरी कहीं भूल ना जाए खो जाए बाजारों में
इसीलिए इसको संभाल दिल बगल बिठा के बैठा हूं
दौलत से ना प्यार खरीदूं प्यार खरीदूं प्यार से
तेरे खातिर सारी दौलत छोड़ छाड़ के बैठा हूं
—Aman Dwivedi