ये रात मेरे सपनों को जानती है।

ये रात मेरे सपनों को जानती है।

सब कहते है की हमे अँधेरे से दुर रहना चाहिए और हम सब भगवान से प्रार्थना करते है की हमारी खुशहाल ज़िंदगी मे कभी अँधेरे का साया मत पड़ने देना। यहाँ तक एक कहावत भी है की 'जिस तरह काली रात के बाद रोशनी से भरी सुबह आती है, उसी तरह हमारे जीवन मे भी दुख के बाद सुख आता है।' लेकिन क्या रात सच मे एक श्राप बन कर आती है? जहाँ तक मुझे याद है बचपन मे मैं रात को अँधेरे मे छत पर अकेले जाने से डरता था, पर अब जब भी किसी दोस्त का फ़ोन आता है तो कितना भी अँधेरा क्यों ना हो मैं सीधा छत पर जाता हुँ। पहले दिन भर मस्ती करके रात को आराम से सोता था, पर अब दिन भर काम करके भी रात को सो नही पाता हुँ। सुबह करी कोशिशे जब कभी नाकाम हो जाती है तो ये रात ही तो है जो मुझे फिरसे सपने देखना सिखाती है। सुबह जिस दुनियाँ की भाग दोड़ मे रहता हुँ, रात को उसी दुनियाँ से दुर भागना चाहता हुँ। सुबह सभी से घिरा हुआ रहता हुँ, पर जब रात को अपने पलंग पर लेटता हुँ, तो सिर्फ खुद में ही खो जाता हुँ। सोने से पहले उन सब सपनो को याद करता हुँ, जिन्हें मैंने दुनियाँ से छुपाया हुआ है और जिन्हें साकार करना ही मैंने अपना मकसद बनाया हैं। सबने मुझे बचपन से ये तो सिखा दिया की रात के बाद सुबह आयेगी उस सुबह का इंतज़ार करो, पर किसी ने ये नही बताया की इस रात से भी सुबह जितना ही प्यार करो। क्युंकि सुबह होते ही तु इस दुनिया की भागदौड़ मैं लग जायेगा और खुद से अलग हो जायेगा लेकिन फिर रात होगी और तु फिर कुछ पल अपने साथ बितायेगा। याद रखना हर रात के बाद सुबह आती है पर ये रात ही है जो हमे सुबह होने के बाद इस दुनिया की भीड़ मे अपने सपनो के लिए लड़ना सिखाती है।

—Ranjan upadhyay